Rama and Shyama Tulsi Difference: हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पवित्र और पूजनीय पौधा माना गया है। हिंदू धर्म से जुड़े हर घर पर तुलसी का पौधा जरूर लगा होता है। शिव परिवार को छोड़कर लगभग सभी देवी-देवताओं की पूजा में तुलसी पत्ते का प्रयोग किया जाता है। खासकर भगवान विष्णु की पूजा तो तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार तुलसी का धार्मिक महत्व होता है लेकिन इसे के साथ इसका औषधीय महत्व भी है। आयुर्वेद में तुलसी की कई प्रजातियों और उसके औषधीय गुणों के बारे में विस्तार से बताया गया है। रामा तुलसी और श्यामा तुलसी महत्वपूर्ण तुलसी की प्रजातियों में भी एक है।
कैसे पहचाने रामा और श्यामा तुलसी
आयुर्वेद में तुलसी की कई प्रजातियों का जिक्र किया गया है और इनकी अलग-अलग औषधीय गुणों के बारे में भी विस्तार से वर्णन किया गया है। इन्हीं में रामा तुलसी और श्यामा तुलसी प्रमुख है। हरी पत्तियों वाली तुलसी को शास्त्रों में रामा तुलसी कहा गया है वहीं बैंगनी या गहरे नीले रंग की तुलसी को श्यामा तुलसी कहा गया है। रामा तुलसी और श्यामा तुलसी को चख कर भी पहचाना जा सकता है। रामा तुलसी खाने में थोड़ी मीठी लगती है जबकि श्यामा तुलसी का टेस्ट थोड़ा कड़वा होता है।
क्या है रामा और श्यामा तुलसी का महत्व
पौराणिक धर्म ग्रंथों में तुलसी के पौधों को एक विशेष महत्व दिया गया है। हिंदू धर्म ग्रंथों में ऐसी मान्यता है की तुलसी में भगवान विष्णु का वास होता है। यही कारण है कि हिंदू धर्म से जुड़ी पूजा-पाठ और शुभ कामों में तुलसी के पत्तों का प्रयोग किया जाता है।
वास्तु शास्त्र में भी महत्वपूर्ण है रामा और श्यामा तुलसी
वास्तु शास्त्र में रामा तुलसी और श्यामा तुलसी दोनों का अलग-अलग महत्व बताया गया है। वास्तु के अनुसार घर में तुलसी के पौधे लगाने से सुख समृद्धि आती है। वास्तु ग्रंथों में घर में रामा तुलसी या श्यामा तुलसी किसी को भी लगाने की बात कही गई है।
जानें घर में तुलसी लगाने का वैज्ञानिक नजरिया
बढ़ते प्रदूषण के बीच वायु की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। लिहाजा अपने घरों के आसपास ऑक्सीजन की सही मात्रा होना उतना ही जरूरी है। कई रिसर्चों में ये बात खुल कर सामने आई है कि तुलसी का पौधा 24 घंटे ऑक्सीजन प्रदान करता है। इसलिए इस पौधे को अपने घर में या घर के आसपास लगाने से ऑक्सीजन का संतुलन बना रहता है।
(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

