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- मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना के बीच नई बुलेट ट्रेनों की तैयारियां शुरू
- एक साल के भीतर 6 नए रूट्स की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट हो जाएगी तैयार
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधान मंत्री शिन्जो आबे ने सितंबर, 2017 में शुरू की थी यह परियोजना
नई दिल्ली: महत्वाकांक्षी अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना के लिये भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का मामला भले ही अभी कोर्ट में चल रहा हो लेकिन देश में 6 नए हाईस्पीड कॉरीडोर्स की पहचान कर ली गई है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने बुधवार बताया कि इन खंडों पर एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट एक वर्ष के भीतर तैयार हो जाएगी। नए कॉरिडोर निर्माणाधीन मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड मार्ग से जुड़ेंगे।
हाई-स्पीड कॉरिडोर पर ट्रेनें 300 किमी / घंटा की अधिकतम गति से चल सकती हैं, जबकि एक सेमी-हाई स्पीड कॉरिडोर पर अधिकतम गति 160 किमी / घंटा से अधिक की स्पीड तक जा सकती है। यादव ने केंद्रीय बजट से पहले एक ब्रीफिंग में बताया कि छह कॉरिडोर में दिल्ली-नोएडा-आगरा-लखनऊ-वाराणसी (865 किलोमीटर), दिल्ली-जयपुर-उदयपुर-अहमदाबाद (886 किमी), दिल्ली-चंडीगढ़-लुधियाना-जालंधर-अमृतसर (459 किलीमीटर), मुंबई-नासिक-नागपुर (753 किलोमीटर लंबा), मुंबई-हैदराबाद (711 किलोमीटर) तथा चेन्नई-बंगलूर-मैसूर (435 किलोमीटर) के कॉरिडोर्स शामिल हैं।
यादव ने कहा, 'हमने इन छह गलियारों की पहचान की है और उनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) वर्ष के भीतर तैयार की जाएगी। डीपीआर इन मार्गों की व्यवहार्यता का अध्ययन करेगा जिसमें जमीन की उपलब्धता, संरेखण और वहां यातायात क्षमता का अध्ययन शामिल है। इन सबके बाद हम तय करेंगे कि क्या वे उच्च गति या अर्ध-उच्च गति गलियारे होंगे या नहीं।'
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधान मंत्री शिन्जो आबे ने सितंबर, 2017 में यह परियोजना शुरू की थी। अहमदाबाद-मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन 320-350 प्रति किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी और 508 किलोमीटर की इस दूरी में 12 स्टेशन होंगे।
यादव ने यह भी कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए 90 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण का काम अगले छह महीनों में पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा, 'हमें परियोजना के लिए 1,380 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। 1,005 हेक्टेयर निजी भूमि थी, जिसमें से हमने 471 हेक्टेयर की अधिग्रहित कर ली है। 149 हेक्टेयर राज्य सरकार की भूमि थी, जिसमें से हमें 119 हेक्टेयर मिल गई है।