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जेल में नवजोत सिंह सिद्धू की पहली रात, सारी रात करवटें बदलते रहे 'गुरु' !

Know how Navjot Singh Sidhu spent his first night in Patiala Jail
Updated May 21, 2022 | 08:07 IST

Sidhu in Jail: सिद्धू ने शुक्रवार शाम चार बजे के बाद आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद उन्हें अनिवार्य चिकित्सकीय जांच के लिए माता कौशल्या अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सा जांच के बाद उन्हें पटियाला केंद्रीय जेल भेज दिया गया।

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Know how Navjot Singh Sidhu spent his first night in Patiala JailKnow how Navjot Singh Sidhu spent his first night in Patiala Jail
तस्वीर साभार:&nbspANI
जानिए कैसी कटी सिद्धू की जेल में पहली रात
मुख्य बातें
  • जानिए कैसी कटी सिद्धू की जेल में पहली रात
  • 1988 का गुनााह 2022 में सजा, पार्किंग में लड़ाई जेल तक ले आई
  • सिद्धू ने किया था ख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित मल्हान की अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण

Sidhu in Jail: कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने 1988 के ‘रोड रेज’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार को एक स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू को पटियाला जेल के 10 नंबर वार्ड में रखा गया है। जो करीब 10 बाय 15 फीट का है। कैदी नंबर 241383 बने सिद्धू की पहली रात जेल में करवटें बदलते हुए निकली।

सिद्धू को जेल में मिला ये सामान

जेल में सिद्धू को एक कुर्सी, मेज, एक अलमारी, एक कंबल, एक बेड, दो टॉवल, एक मच्छरदानी, एक कॉपी पेन, एक जोड़ी शूज और दो बेडशीट के अलावा चार कुर्ते पजामे दिए गए। लग्जरी लाइफस्टाइल में रहने वाले सिद्ध जेल में सादे कपड़ों और लाइफस्टाइल में रहेंगे। 34 साल पुराने रोड रेज केस में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई है। जिसके बाद शुक्रवार को उन्होंने पटियाला कोर्ट में सरेंडर कर दिया। 

1988 के मामले में सजा

 बता दें 27 दिसंबर 1988 में पटियाला में पार्किंग को लेकर सिद्धू का विवाद हो गया था। विवाद इतना बढ़ा कि मारपीट के बाद गुरनाम सिंह नाम के शख्स की अस्पताल में मौत हो गई। 22 सितंबर 1999 को लोअर कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया गया था। लेकिन इसके बाद मामला पहले हाईकोर्ट पहुंचा... फिर सुप्रीम कोर्ट। जहां 25 मार्च 2022 को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। और 19 मई कोर्ट ने सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई। ‘रोड रेज’ की घटना में 65 वर्षीय बुजुर्ग गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। न्यायालय के फैसले के बाद जब पत्रकारों ने सिद्धू से इस पर प्रतिक्रिया मांगी थी तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था।

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