Alternative Investment Funds: अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स को SEBI ने दी राहत, इस डेडलाइन में दी ढील, जानिए पूरी डिटेल

Alternative Investment Funds: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) को अपने निवेश को बनाए रखने की समयसीमा में ढील देने का फैसला किया है। शुक्रवार, 14 फरवरी को, सेबी ने घोषणा की कि, वह एआईएफ के लिए अपने निवेश को डीमैटेरियलाइज्ड फॉर्म में रखने की समयसीमा में ढील देगा।

Alternative Investment Funds

अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स को राहत

मुख्य बातें
  • अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स को राहत
  • सेबी ने दी ढील
  • 31 अक्टूबर तक मौका

Alternative Investment Funds: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) को अपने निवेश को बनाए रखने की समयसीमा में ढील देने का फैसला किया है। शुक्रवार, 14 फरवरी को, सेबी ने घोषणा की कि, वह एआईएफ के लिए अपने निवेश को डीमैटेरियलाइज्ड फॉर्म में रखने की समयसीमा में ढील देगा। फ्रेमवर्क में संशोधन करते हुए, बाजार नियामक सेबी ने कहा है कि 1 जुलाई से पहले किए गए निवेश को एक निश्चित डेट से पहले डीमैटरियलाइज्ड फॉर्म में कंवर्ट किया जाना चाहिए। इसके अलावा, बाजार नियामक ने एआईएफ की योजनाओं को भी छूट दी है। तो, नई समयसीमा क्या है? नए नियम क्या हैं?

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जान लीजिए नए नियम

ईटी नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जुलाई 2025 को या उसके बाद AIF द्वारा किए गए निवेश को केवल डीमैट रूप में ही रखा जाएगा। सेबी के एक सर्कुलर के अनुसार, यदि कोई AIF 1 जुलाई को या उसके बाद कोई निवेश करता है, तो उस निवेश को केवल डीमैट रूप में ही रखा जाना चाहिए।

यह इस बात पर ध्यान दिए बिना लागू होता है कि निवेश सीधे निवेशित कंपनी में किया गया है या किसी अन्य यूनिट से खरीदा गया है।

31 अक्टूबर होगी अहम डेट

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सर्कुलर में आगे कहा गया है कि 1 जुलाई से पहले किए गए किसी भी निवेश को, स्पेसिफिक मामलों को छोड़कर, डीमैट रूप में रखने की आवश्यकता से मुक्त किया गया है। अपडेटेड फ्रेमवर्क में कहा गया है कि 1 जुलाई से पहले किए गए निवेश को 31 अक्टूबर तक डीमैट रूप में कंवर्ट किया जाना चाहिए।

यदि एआईएफ की निवेशित फर्म को डीमैट रूप में निवेश करने का सपोर्ट करने के लिए अथॉराइज्ड किया गया है, या यदि एआईएफ अन्य सेबी-रजिस्टर्ड एंटिटीज के साथ कंपनी पर कंट्रोल रखता है, तो उन्हें डीमैट रूप में निवेश रखना होगा।

और किसे मिलेगी छूट

बाजार नियामक ने एआईएफ की उन योजनाओं को भी छूट दी है, जिनकी अवधि, स्वीकृत विस्तार अवधि को छोड़कर, 31 अक्टूबर को या उससे पहले समाप्त हो रही है। साथ ही उन योजनाओं को भी छूट दी है, जो 14 फरवरी तक पहले से ही विस्तारित अवधि में हैं।

डिस्क्लेमर : यहां मुख्य तौर पर म्यूचुअल फंड की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। म्यूचुअल फंड में जोखिम होता है, इसलिए निवेश अपने जोखिम पर करें। निवेश करने से पहले एक्सपर्ट की राय जरूर लें।

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काशिद हुसैन author

काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की ब...और देखें

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