WPI: रिटेल के बाद अब थोक महंगाई में भी गिरावट, जुलाई में घटकर 2.04 फीसदी पर आई
WPI: थोक मूल्य सूचकांक में जुलाई में गिरावट इस महीने के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों के अनुरूप रही। इस सप्ताह की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति पांच साल के निचले स्तर 3.54 प्रतिशत पर आ गई।
थोक महंगाई दर में गिरावट।
WPI:रिटेल महंगाई दर के बाद थोक महंगाई पर भी जुलाई में राहत मिली है। यह घटकर 2.04 प्रतिशत रह गई। जबकि जून थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर 3.36 प्रतिशत थी। थोक महंगाई में आई राहत की प्रमुख वजह प्राथमिक उत्पादों की कीमतों में कमी आना रहा है। हालांकि इस दौरान ईंधन तथा बिजली की महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई है। अहम बात यह है कि थोक महंगाई दर, रिटेल महंगाई दर के अनुरूप रही है। जो कि 5 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। थोक महंगाई दर में इसके पहले जून तक लगातार चार महीने बढ़ोतरी हुई थी। यह जून में 3.36 प्रतिशत थी।
क्या हुआ सस्ता क्या हुआ महंगा
आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में खाद्य मुद्रास्फीति 3.45 प्रतिशत रही, जो जून में 10.87 प्रतिशत थी। इसकी मुख्य वजह सब्जियों, अनाज, दालों और प्याज की कीमतों में मासिक आधार पर गिरावट रही।सब्जियों की कीमतों में जुलाई में 8.93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जून में इनमें 38.76 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।
उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुसार डब्ल्यूपीआई पर आधारित मुद्रास्फीति की वार्षिक दर जुलाई 2024 में 2.04 प्रतिशत रही, जबकि जून 2024 में यह 3.36 प्रतिशत थी।थोक मूल्य सूचकांक के प्राथमिक उत्पादों की मुद्रास्फीति की वार्षिक दर जुलाई 2024 में 3.08 प्रतिशत रही, जबकि जून 2024 में यह 8.80 प्रतिशत थी। ईंधन तथा बिजली की मुद्रास्फीति की वार्षिक दर बढ़कर 1.72 प्रतिशत हो गई, जो जून 2024 में 1.03 प्रतिशत थी।
डीपीआईआईटी के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक के निर्मित उत्पाद की मुद्रास्फीति की वार्षिक दर जून 2024 में 1.43 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई 2024 में 1.58 प्रतिशत हो गई।थोक मूल्य सूचकांक में जुलाई में गिरावट इस महीने के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों के अनुरूप रही। इस सप्ताह की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति पांच साल के निचले स्तर 3.54 प्रतिशत पर आ गई।
अगली पॉलिसी में सस्ता हो सकता है कर्ज
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से रिटेल महंगाई दर को ध्यान में रखता है। आरबीआई ने अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर को लगातार नौवीं बार 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखा था। ऐसे में जब रिटेल महंगाई आने वाले दिनों में घटेगी तो आरबीआई के लिए रेपो रेट में कटौती राह खुल सकती है।
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