दो अप्रैल से लागू होने जा रहा 'ट्रंप टैरिफ', दुनिया के कारोबार पर होगा असर, भारत भी अछूता नहीं, ये सेक्टर होंगे प्रभावित

Trump Tarrif War : अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार देश है। वह अंडे से लेकर मर्सिडीज कार तक खरीदता है। खरीद का उसका दायरा बहुत बड़ा है। कई देशों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक अमेरिकी खरीद पर निर्भर है। रिपोर्टों के मुताबिक साल 2023 में अमेरिका ने दुनिया भर से 3.17 खरब डॉलर मूल्य के वस्तुएं एवं उत्पाद आयात किए।

Donald Trump

ट्रंप के टैरिफ वार का दुनिया पर होगा असर।

Trump Tarrif War : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ 'हथियार' दो अप्रैल से लागू हो जाएगा। ट्रंप के इस टैरिफ वार से दुनिया का कोई देश नहीं बचेगा। इसकी चपेट में पांचों महाद्वीप आ गए हैं। इस टैरिफ के प्रभावी होने के बाद इसका असर भी दिखना शुरू हो जाएगा। खास बात यह है कि ट्रंप के इस टैरिफ वार से भारत भी नहीं बचा है। यह अलग बात है कि इससे राहत पाने के लिए भारत और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है लेकिन अभी तक कोई रास्ता नहीं निकला है। ट्रंप ने रविवार को एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह किसी देश को रियायत देने नहीं जा रहे हैं। दो अप्रैल से अमेरिका में आयात होने वाली अलग-अलग वस्तुओं एवं उत्पादों पर 10 से 25 फीसद तक टैरिफ प्रभावी हो जाएगा।

उन्होंने कहा, 'यह बिना अपवाद के सभी देशों पर लागू होगा।' रविवार को एयरफोर्स वन में मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा, 'सभी देश...उन सभी देशों पर यह टैरिफ लागू होगा जिनकी हम बात कर रहे हैं। किसी के लिए कोई रियायत नहीं है।' रिपोर्टर ने सवाल किया कि उन देशों खासकर ऐसे 10-15 मुल्क जिनका अमेरिका के साथ व्यापार संतुलन सबसे ज्यादा है, क्या उन पर यह टैरिफ लगेगा? हालांकि, ट्रंप ने जोर देकर कहा कि यह टैरिफ बहुत ही 'विनम्र स्वभाव' वाला होगा। भारत का नाम लिए बगैर ट्रंप ने कहा कि 'आप कुछ खास देशों में जाएं, आप एशिया के हर देश को देखें। कारोबार में इन देशों ने अमेरिका के साथ क्या किया है। मैं यह नहीं कहूंगा कि किसी ने हमारे साथ बराबरी का व्यवहार किया है लेकिन हम उनके साथ बहुत ही विनम्रता से पेश होने जा रहे हैं।'

टैरिफ को हथियार क्यों बना रहे ट्रंप?

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार देश है। वह अंडे से लेकर मर्सिडीज कार तक खरीदता है। खरीद का उसका दायरा बहुत बड़ा है। कई देशों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक अमेरिकी खरीद पर निर्भर है। रिपोर्टों के मुताबिक साल 2023 में अमेरिका ने दुनिया भर से 3.17 खरब डॉलर मूल्य के वस्तुएं एवं उत्पाद आयात किए। यानी यह दुनिया में आयाता होने वाली सामग्रियों में यह हिस्सा 13 प्रतिशत से ज्यादा है। ट्रंप का कहना है कि इन देशों के उत्पादों पर अमरिका बहुत कम टैरिफ लगाता है लेकिन ये देश अपने यहां उसके उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाते हैं। ये अब नहीं चलेगा। ट्रंप उतना ही टैरिफ इन देशों के उत्पादों पर लगाने जा रहे हैं जितना कि ये देश उनके उत्पादों पर लगाते हैं। नया टैरिफ लगने के बाद अमेरिका में इन देशों के उत्पादों की कीमत बढ़ जाएगी। कीमत बढ़ने से अमेरिकी लोग अमेरिकी उत्पादों को खरीदने के लिए आगे आएंगे।

अमेरिका में फैक्ट्रियां चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति

ट्रंप का यह भी कहना है कि देश अगर चाहते हैं कि उनके उत्पादों पर टैरिफ कम लगे तो उन्हें अपनी फैक्ट्रियां अमेरिका में लगानी होंगी। अमेरिका में फैक्ट्रियां यदि लगती हैं तो इससे वहां पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और अमेरिकी युवाओं को रोजगार मिलेगा और अर्थव्यवस्था बढ़ेगी। दूसरा, टैरिफ लगने के बाद बाहरी देशों की वस्तुएं महंगी होने पर लोग उनके यहां बनी वस्तुओं एवं उत्पादों को खरीदेंगे। इससे अमेरिका में बनी हुई चीजों की खपत ज्यादा होगी। ट्रंप की यह सोच गलत नहीं है क्योंकि हर देश अपने व्यापारिक हितों के हिसाब से फैसला करता है। ट्रंप भी इसी सोच से टैरिफ लगा रहे हैं। हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि ऑटोमोबाइल आयात पर 25 फीसद अन्य आयातों पर टैरिफ लगने से दुनिया के बाजारों पर व्यापक असर पड़ेगा। खासकर वे देश जो अमेरिका को सबसे ज्यादा वाहन बेचते हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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व्यापार असंतुलन कम करना चाहते हैं ट्रंप

टैरिफ लगाने का ट्रंप का दूसरा बड़ा मकसद देशों के साथ अपना व्यापार असंतुलन कम करना है। अमेरिका का यह व्यापार घाटा अलग-अलग देशों के साथ अलग-अलग है। उदाहरण के तौर पर यूरोपीय यूनियन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 213 अरब डॉलर का है। यही नहीं फेंटानिल ड्रग पर रोक के लिए भी टैरिफ का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि चीन, मैक्सिको और कनाडा से भारी मात्रा में यह ड्रग पहुंचता है। वह चाहते हैं कि यह ड्रग अमेरिका न पहुंचे, इसलिए ये देश इस पर रोक लगाएं।

अमेरिका के 5 सबसे बड़े कारोबारी पार्टनर
  • मैक्सिको
  • कनाडा
  • चीन
  • जर्मनी
  • जापान

टैरिफ पर ट्रंप की अहम घोषणाएं

चार फरवरी

-चीन से आयात होने वाली वस्तुओं पर 10 फीसद टैरिफ

4 मार्च

-चीन के सामानों पर 10 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाकर 20 फीसद किया

-मैक्सिको, कनाडा की वस्तुओं पर 25% टैरिफ, कनाडा ऊर्जा आयात पर 10 फीसद टैरिफ

12 मार्च

स्टील एवं एल्यूमीनियम आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ

2 अप्रैल

अमेरिका आने वाली सभी कारों पर 25 फीसद टैरिफ

ट्रंप के टैरिफ का भारत पर क्या होगा असर?

ट्रंप ने कहा है कि वह दो अप्रैल को दूसरे देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अलग से टैरिफ की घोषणा करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि यूएस व्हिस्की पर ईडी ने यदि 50 फीसद टैरिफ लगाया तो वह ईयू से अमेरिका आने वाले अल्कोहल पर 200 फीसद टैरिफ लगाएंगे। क्या वह भारतीय सामानों पर भी उतना ही टैरिफ लगाएंगे जितना कि भारत लगाता आया है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, एक्सपर्ट मानते हैं कि टैरिफ पर दोनों सरकारों के बीच बातचीत चल रही है। हो सकता है कि कोई बीच का रास्ता निकल आए और भारत पर 'पारस्परिक टैरिफ' न लगे। भारत और अमेरिका के कारोबार की अगर बात करें तो 2021-22 से 2023-24 के बीच अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर था। भारत के कुल नर्यात में अमेरिकी हिस्सेदारी करीब 18 फीसद है जबकि आयात में 6.22 प्रतिशत है। साल 2023-24 में अमेरिका के साथ भारत का व्यापार बचत (आयात-निर्यात का अंतर) 35.32 अरब डॉलर का था। ट्रंप की घोषणाओं के मुताबिक भारतीय उत्पादों पर कितना और किस तरह का टैरिफ लग सकता है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

टैरिफ से भारत के ये सेक्टर हो सकते हैं प्रभावित

अमेरिका दो अप्रैल से भारतीय ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स पर 25% टैरिफ लगा सकता है। इससे भारतीय वाहन निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है, हालांकि कुछ ऑटो पार्ट्स निर्माता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव के कारण अवसर पा सकते हैं। यही नहीं अमेरिका भारतीय जेनेरिक दवाओं का एक प्रमुख बाजार है, और उच्च टैरिफ से लागत बढ़ सकती है। इससे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज जैसी भारतीय फार्मा कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता अमेरिकी बाजार में कम हो सकती है। इलेक्ट्रानिक उत्पादों स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर और आईटी हार्डवेयर पर उच्च टैरिफ भारतीय निर्यातकों को नुकसान पहुंचा सकता है। बढ़ी हुई लागत के कारण अमेरिकी बाजार में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग घट सकती है। अमेरिका भारतीय हीरे और स्वर्ण आभूषणों का एक बड़ा आयातक है। टैरिफ बढ़ने से निर्यात में गिरावट आ सकती है और भारत के आभूषण उद्योग की छोटी कंपनियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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आलोक कुमार राव author

करीब 20 सालों से पत्रकारिता के पेशे में काम करते हुए प्रिंट, एजेंसी, टेलीविजन, डिजिटल के अनुभव ने समाचारों की एक अंतर्दृष्टि और समझ विकसित की है। इ...और देखें

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