संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में अधिक महिलाओं को शामिल करने को राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया आवश्यक; जयशंकर ने कही ये बड़ी बातें
UN Peacekeeping Missions: भारत के विदेश, रक्षा मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा केंद्र ने मिल कर इस सम्मेलन का आयोजन पहली बार भारत में किया है। इसमें 35 देशों की महिला शांति रक्षक भाग ले रही हैं । सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षण में अपने योगदान पर भारत को गर्व है। वहीं राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में अधिक महिलाओं को शामिल करना आवश्यक है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विदेश मंत्री एस जयशंकर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में अधिक संख्या में महिलाओं को शामिल करना जरूरी है क्योंकि वे लैंगिक हिंसा से निपटने, विश्वास कायम करने और संवाद को बढ़ावा देने में ज्यादा सक्षम होती हैं। राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मुलाकात करने आईं महिला शांति रक्षकों के एक समूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शांति मिशन में महिलाओं की उपस्थिति इसे और अधिक विविध और समावेशी बनाती है।
महिला शांति रक्षकों के बारे में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने क्या कहा?
मुर्मू ने कहा, 'महिला शांति रक्षकों की स्थानीय समुदायों तक बेहतर पहुंच होती है और वे महिलाओं और बच्चों के लिए आदर्श बन सकती हैं। वे लैंगिग हिंसा से निपटने, विश्वास कायम करने और संवाद को बढ़ावा देने में अधिक सक्षम हैं।' राष्ट्रपति ने कहा कि जिन शांति मिशनों में महिला कर्मियों का प्रतिशत अधिक है, वे हिंसा को कम करने तथा दीर्घकालिक शांति समझौते प्राप्त करने में अधिक प्रभावी रहे हैं। उन्होंने कहा, ' इसलिए यह आवश्यक है कि हम संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में अधिकाधिक महिलाओं को शामिल करें।'
'छह मिशनों में 154 से अधिक भारतीय महिला शांति रक्षक तैनात'
राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में योगदान के भारत के गौरवशाली इतिहास को याद किया, जिसमें 50 से अधिक मिशनों में 2,90,000 (2.90 लाख) से अधिक शांति रक्षकों ने सेवाएं दी हैं। मुर्मू ने कहा, 'आज अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए नौ सक्रिय मिशनों में 5,000 से अधिक भारतीय शांति रक्षक तैनात हैं।' मुर्मू ने कहा, 'आज संयुक्त राष्ट्र के छह मिशनों में 154 से अधिक भारतीय महिला शांति रक्षक तैनात हैं। 1960 के दशक में कांगो से लेकर 2007 में लाइबेरिया तक, हमारी महिला शांति रक्षकों ने व्यावसायिकता और आचरण की उच्चतम परंपराओं का प्रदर्शन किया है।'
राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, महिला शांति रक्षक 'शांति स्थापना में महिलाएं: एक ग्लोबल साउथ परिप्रेक्ष्य' विषय पर एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन विदेश मंत्रालय द्वारा रक्षा मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र, नई दिल्ली के साथ साझेदारी में किया जा रहा है।
इस सम्मेलन का उद्देश्य ग्लोबल साउथ की महिला अधिकारियों को एक साथ लाना है, ताकि शांति स्थापना के लिए समकालीन प्रासंगिक मुद्दों और शांति मिशनों के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा की जा सके।
महिला शांतिरक्षकों के बारे में क्या बोले विदेश मंत्री जयशंकर?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में सार्थक योगदान देना जारी रखेगा और वह शांति रक्षण क्षमताओं के निर्माण में ‘ग्लोबल साउथ’ देशों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। जयशंकर ने यह भी कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में शांति अभियानों में महिलाओं की भागीदारी ने मिशन को और अधिक विविधतापूर्ण तथा समावेशी बना दिया है। विदेश मंत्री ‘ग्लोबल साउथ की महिला शांतिरक्षकों’ पर भारत की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
सम्मेलन में 35 देशों की महिला शांतिरक्षक शामिल हो रही हैं जो शांति स्थापना अभियानों में महिलाओं की उभरती भूमिका का पता लगाने और उनकी भागीदारी बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा करेंगी। इसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ के देशों के बीच संवाद को बढ़ावा देकर, अनुभव साझा करके और सहयोग में सुधार करके संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना है।
'भारत ने दुर्भाग्य से लगभग 180 शांति सैनिकों को खो दिया'
जयशंकर ने कहा कि भारत को अपने योगदान और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के साथ जुड़ाव पर गर्व है, यह एक प्रतिबद्धता है जो दशकों से बनी हुई है। उन्होंने कहा, '1950 के दशक से भारत ने 50 से अधिक मिशनों में 2,90,000 से अधिक शांतिरक्षक भेजे हैं। वास्तव में, भारत आज भी सबसे अधिक सैन्य योगदान देने वाला देश बना हुआ है।' जयशंकर ने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि शांतिरक्षण अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखने में एक ‘प्रभावी साधन’ है। उन्होंने कहा, 'भारत ने दुर्भाग्य से लगभग 180 शांति सैनिकों को खो दिया है, जिनके सर्वोच्च बलिदान हमारे सामूहिक प्रयासों के इतिहास में हमेशा के लिए अंकित हैं।'
शांति अभियानों में महिलाओं की भागीदारी पर बोले जयशंकर
जयशंकर ने कहा, 'शांति अभियानों में महिलाओं की भागीदारी इसे और अधिक विविधतापूर्ण एवं समावेशी बनाती है। यह आवश्यक है कि हम शांति स्थापना में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाते रहें।' उन्होंने कहा, 'यह केवल मात्रा का ही मामला नहीं है, बल्कि गुणवत्ता का भी मामला है। महिला शांति सैनिकों की अकसर स्थानीय समुदायों तक अद्वितीय पहुंच होती है, जो संघर्ष क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आदर्श के रूप में कार्य करती हैं।'
वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत पर चलता है भारत: जयशंकर
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को उनकी शांति स्थापना क्षमताओं के निर्माण में सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षण के लिए केंद्र के नेतृत्व में की गईं पहल के माध्यम से भारत महिला शांतिरक्षकों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए पाठ्यक्रमों सहित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रदान करना जारी रखेगा, जैसा कि हमने 2023 में आसियान देशों के साथ किया था।'
जयशंकर ने कहा, 'वसुधैव कुटुम्बकम के दुनिया को एक परिवार मानने के दर्शन से प्रेरित भारत संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षण के लिए सार्थक योगदान देना जारी रखेगा।' अपने उद्घाटन भाषण में, सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने महिला शांतिसैनिकों की असाधारण सेवा और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के लिए सराहना की।
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