Baglamukhi Jayanti 2024: बगलामुखी जयंती कब है 14 या 15 मई, इस दिन करें ये उपाय हर कष्ट से मिलेगी मुक्ति
Baglamukhi Jayanti 2024 Date And Time: सनातन धर्म में मां बगलामुखी शत्रुओं का नाश करने वाले देवी के रूप में जानी जाती हैं। हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को इनकी जयंती मनाई जाती है। जानिए इस साल बगलामुखी जयंती कब है।
Baglamukhi Jayanti 2024 Date And Time
Baglamukhi Jayanti 2024 Date And Time: हिंदू धर्म में मां बगलामुखी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यताओं अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी अवतरित हुई थीं। कहते हैं जो व्यक्ति इस शुभ दिन पर सच्चे मन से मां की अराधना करता है उसे शत्रुओं से जुड़ी तमाम समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन मां बगलामुखी के बीज मंत्र (ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः॥) का जाप करना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। यहां जानिए 2024 में बगलामुखी जयंती कब है और इस दिन किन उपायों को करने से शत्रुओं से छुटकारा पा सकते हैं।
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Baglamukhi Jayanti 2024 Date And Time (बगलामुखी जयंती कब है 2024)
इस साल बगलामुखी जयंती 15 मई की सुबह 4 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर 16 मई की सुबह 06 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार ये त्योहार 15 मई को मनाया जाएगा।
Baglamukhi Jayanti Upy (बगलामुखी जयंती के उपाय)
- मां बगलामुखी की प्रसन्नता हासिल करने के लिए बगलामुखी जयंती के दिन इनकी विधि विधान पूजा करें। पूजा में ज्यादा से ज्यादा पीले रंग का इस्तेमाल करें। जैसे स्वयं पीले वस्त्र पहनें। माता को पीले फूल चढ़ाएं। साथ ही माता की पूजा पीले रंग के आसन पर बैठकर करें।
- बगलामुखी जयंती के दिन देवी के विग्रह या यंत्र की स्थापना करना शुभ माना जाता है। कहते हैं इस उपाय को करने से घर में सकारात्मकता आती है।
- इस दिन मां बगलामुखी के बीज मंत्र: 'ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम:' का जाप जरूर करें। इससे शत्रु बाधा से मुक्ति मिलेगी।
- इस दिन माता को पीली वस्तुओं का भोग अर्पित करें। कहते हैं इससे भी मां बगलामुखी शीघ्र प्रसन्न होती हैं और जीवन में आर्थिक सम्पन्नता बने रहने का आशीर्वाद देती हैं।
- बगलामुखी जयंती के दिन मां को चने की दाल अर्पित करने से नजर दोष से मुक्ति मिलती है।
Maa Baglamukhi Mantra (मां बगलामुखी मंत्र)
- ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।
- ऊँ ह्रीं बगलामुखी देव्यै ह्रीं ऊँ नमः
Maa Baglamukhi ki Utpatti (मां बगलामुखी की उत्पत्ति)
पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय पृथ्वी पर एक विशाल प्रलयकारी चक्रवात आया था जिससे सम्पूर्ण सृष्टि खतरे में पड़ गई थी। इस संकट से मुक्ति के लिए सभी देवताओं ने देवी के समक्ष प्रार्थना की। देवताओं की प्रार्थना से देवी बगलामुखी हरिद्रा सरोवर से प्रकट हुयीं और उन्होंने इस भीषण चक्रवात को शान्त कर दिया।
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धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करि...और देखें
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