Tulsi Vivah 2022 Puja Vidhi, Muhurat, Aarti: तुलसी विवाह के दिन पढ़ें ये पूजा एवं ध्यान मंत्र, मिलेगा फल
तुलसी विवाह का महत्व: हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का बेहद खास महत्व माना जाता है। मान्यताओं अनुसार जो कोई भी व्यक्ति भगवान शालिग्राम और तुलसी का विवाह संपन्न कराता है उसके वैवाहिक जीवन में आ रही सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। वहीं जिन लोगों के विवाह में अड़चन आ रही है या शादी बार-बार टूट रही है उनके लिए भी तुलसी विवाह फलदायी माना जाता है। ऐसी भी मान्यता है जिन भी दंपत्ति को कन्या सुख नहीं प्राप्त होता है उन्हें तुलसी विवाह करने से बेहद ही पुण्य मिलता है।
तुलसी विवाह की संपूर्ण विधि:
तुलसी विवाह शाम में किये जाने की परंपरा है।
तुलसी के गमले पर गन्ने से मंडप बनायें।
तुलसी को लाल चुनरी और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
इसके बाद गमले में शालिग्राम जी को रखें और विवाह की रस्में शुरू करें।
विवाह के सभी नियमों के विधि विधान पालन करें।
शालिग्राम और तुलसी के पौधे को हल्दी जलाएं और मंडप पर भी हल्दी का लेप लगाएं।
शालिग्राम भगवान और तुलसी माता की विधि विधान पूजा करें।
उन्हें मिठाई और प्रसाद का भोग लगाएं।
विवाह की रस्में पूरे करने के बाद प्रसाद सभी में बांट दें।
तुलसी विवाह मुहूर्त: तुलसी विवाह द्वादशी के दिन किए जाने की परंपरा है। द्वादशी तिथि 4 नवंबर को शाम 6 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी और इसकी समाप्ति 5 नवंबर को शाम 5 बजकर 6 मिनट पर होगी।
तुलसी विवाह से संबंधित सभी महत्वपूर्ण बातें जानने के लिए बने रहिए हमारे इस लाइव ब्लॉग पर...
तुलसी माता का ध्यान मंत्र
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।मां तुलसी का पूजन मंत्र
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।तुलसी माता का स्तुति मंत्र
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः,नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।तुलसी का विवाह शालीग्राम से होने पर प्रसन्न होते हैं भगवान विष्णु
तुलसी विवाह शनिवार 05 नवंबर 2022 को होगी। तुलसी जी का विवाह शालीग्राम के साथ कराने पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। तुलसी विवाह के दिन तुलसी जी और भगवान शालीग्राम के विवाह का आयोजन किया जाता है।Tulsi Vivah - वैवाहिक जीवन खुशहाल
सुखद वैवाहिक जीवन के लिए एस दिन माता तुलसी और श्रीहरि भगवान विष्णु के शालिग्राम अवतार की विधिवत विवाह करवाएं। इससे वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है। तथा जीवन में आने वाले सभी कष्टों का निवारण होता है।इस तरह करें माता का श्रंगार
इस तुलसी के पौधे को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। तुलसी को साक्षात माता का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में तुलसी के गमले की मिट्टी में ही गन्ने से मंडप बनाएं और उस पर सुहाग का प्रतीक लाल चुनरी ओढ़ा दें। इसके साथ ही गमले को साड़ी लपेट कर तुलसी को चूड़ी पहना कर उनका दुल्हन की तरह श्रृंगार करें।Tulsi Vivah - माता तुलसी और भगवान विष्णु की करें पूजा
इस दिन विधि विधान से माता तुलसी और श्रीहरि भगवान विष्णु के शालिग्राम अवतार की पूजा अर्चना करें। इससे सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा वैवाहिक जीवन में आने वाले सभी विघ्न बाधाओं का अंत होता है।Tulsi Vivah - सनातन धर्म में इस दिन का विशेष महत्व
सनातन धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। इस दिन श्रीहरि भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा के बाद जागते हैं। साथ ही इस दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। मान्यता है कि, इस दिन विधि विधान से भगवान विष्णु और माता तुलसी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा विवाह में आने वाली सभी विघ्न बाधाएं दूर होती हैं।Tulsi Vivaah - भगवान विष्णु के मंत्र
शान्ता कारं भुजग शयनं पद्म नाभं सुरेशम्भगवान विष्उ के इस मंत्र का करें जप...... विश्वा धारं गगन सदृशं मेघ वर्णं शुभाङ्गम् ।लक्ष्मी कान्तं कमल नयनं योगिभिर्ध्या नगम्यम्वन्दे विष्णुं भव भय हरं सर्वलोकैक नाथम् ।।Tulsi Vivah - तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त
बता दें कई जगहों पर देवउठनी एकादशी के दिन शाम को तुलसी विवाह किया जाता है। बता दें तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त 05 नवंबर 2022 को शाम 06 बजकर 08 मिनट से 06 नवंबर को शाम 5 बजकर 06 मिनट तक है।Tulsi Vivah - तुलसी स्तुति मंत्र
इस मंत्र से करें माता तुलसी की स्तुतिदेवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैःनमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।योग निद्रा से जागते हैं भगवान विष्णु
देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा के बाद जागते हैं। इस दिन चातुर्मास की समाप्ति होती है। तथा सभी शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं। ऐसे में इस दिन विवाह के शुभ मुहूर्त की शुरुआत हो जाता है।Tulsi Vivah Vidhi - तुलसी विवाह विधि
इस दिन सुबह सूर्योदय के से पहले स्नान आदि कर निवृत्त हो जाएं। अब नए वस्त्र धारण करें। इसके बाद तुलसी के वृक्ष को फूल माला, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी आदि चीजों से सजाएं। पहले शालिग्राम और माता तुलसी की आरती करें। इसके बाद विवाह करवाएं।माता तुलसी की आरती
जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता ।सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।।मैय्या जय तुलसी माता।।सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर।रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता।जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता ।सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।।मैय्या जय तुलसी माता।।सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर।रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता।लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में।मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता।मैय्या जय तुलसी माता।।हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी।माता तुलसी की करें आरतीप्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता।हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता।मैय्या जय तुलसी माता।।Tulsi Puja Mantra - माता तुलसी के मंत्र
माता तुलसी के इन मंत्रों का उल्लेख कर करें तुलसी जी की पूजाॐ सुभद्राय नमःTulsi Vivah 2022 - तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त
बता दें तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त 05 नवंबर 2022 को 06 बजकर 8 मिनट से अगले दिन 06 नवंबर को 5 बजकर 06 मिनट तक है।Tusi Vivah 2022 - आज देवउठनी एकादशी
बता दें देवउठनी एकादशी का पावन पर्व आज यानी 04 नवंबर 2022 को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस व्रत कर विधि विधान से श्रीहरि भगवान विष्णु और माता तुलसी की पूजा अर्चना करने से सबी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों का निवारण होता है।पौराणिक कथाओं में उल्लेख
पौरीणिक कथाओं में भी तुलसी विवाह का उल्लेख किया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रीहरि भगवान विष्णु योग निद्रा के बाद जागते हैं। इस दिन से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है।Tulsi Vivah 2022 - भगवान विष्णु का विवाह
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को श्रीहरि भगवान विष्णु के शालिग्राम अवतार का माता तुलसी से विवाह करवाया जाता है। सनातन धर्म में इसका विशेष महत्व है। मान्यता है इससे जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है और शादी विवाह में आने वाली सभी अड़चनें दूर होती हैं।तुलसी मंगलाष्टक मंत्र
ॐ श्री मत्पंकजविष्टरो हरिहरौ, वायुमर्हेन्द्रोऽनलः। चन्द्रो भास्कर वित्तपाल वरुण, प्रताधिपादिग्रहाः ।प्रद्यम्नो नलकूबरौ सुरगजः, चिन्तामणिः कौस्तुभः, स्वामी शक्तिधरश्च लांगलधरः, कुवर्न्तु वो मंगलम् ॥1
गंगा गोमतिगोपतिगर्णपतिः, गोविन्दगोवधर्नौ, गीता गोमयगोरजौ गिरिसुता, गंगाधरो गौतमः ।
गायत्री गरुडो गदाधरगया, गम्भीरगोदावरी, गन्धवर्ग्रहगोपगोकुलधराः, कुवर्न्तु वो मंगलम् ॥2
नेत्राणां त्रितयं महत्पशुपतेः अग्नेस्तु पादत्रयं, तत्तद्विष्णुपदत्रयं त्रिभुवने, ख्यातं च रामत्रयम् । गंगावाहपथत्रयं सुविमलं, वेदत्रयं ब्राह्मणम्, संध्यानां त्रितयं द्विजैरभिमतं, कुवर्न्तु वो मंगलम् ॥3
बाल्मीकिः सनकः सनन्दनमुनिः, व्यासोवसिष्ठो भृगुः, जाबालिजर्मदग्निरत्रिजनकौ, गर्गोऽ गिरा गौतमः । मान्धाता भरतो नृपश्च सगरो, धन्यो दिलीपो नलः, पुण्यो धमर्सुतो ययातिनहुषौ, कुवर्न्तु वो मंगलम् ॥4
गौरी श्रीकुलदेवता च सुभगा, कद्रूसुपणार्शिवाः, सावित्री च सरस्वती च सुरभिः, सत्यव्रतारुन्धती ।
स्वाहा जाम्बवती च रुक्मभगिनी, दुःस्वप्नविध्वंसिनी, वेला चाम्बुनिधेः समीनमकरा, कुवर्न्तु वो मंगलम् ॥5
गंगा सिन्धु सरस्वती च यमुना, गोदावरी नमर्दा, कावेरी सरयू महेन्द्रतनया, चमर्ण्वती वेदिका ।
शिप्रा वेत्रवती महासुरनदी, ख्याता च या गण्डकी, पूर्णाः पुण्यजलैः समुद्रसहिताः, कुवर्न्तु वो मंगलम् ॥6
लक्ष्मीः कौस्तुभपारिजातकसुरा, धन्वन्तरिश्चन्द्रमा, गावः कामदुघाः सुरेश्वरगजो, रम्भादिदेवांगनाः ।
अश्वः सप्तमुखः सुधा हरिधनुः, शंखो विषं चाम्बुधे, रतनानीति चतुदर्श प्रतिदिनं, कुवर्न्तु वो मंगलम् ॥7
ब्रह्मा वेदपतिः शिवः पशुपतिः, सूयोर् ग्रहाणां पतिः, शुक्रो देवपतिनर्लो नरपतिः, स्कन्दश्च सेनापतिः ।
विष्णुयर्ज्ञपतियर्मः पितृपतिः, तारापतिश्चन्द्रमा, इत्येते पतयस्सुपणर्सहिताः, कुवर्न्तु वो मंगलम् ॥8
॥ इति मंगलाष्टक समाप्त ॥
चेक कर लें तुलसी विवाह की सामग्री लिस्ट (Tulsi Vivah Samagri List)
पूजा में मूली, आंवला, बेर, शकरकंद, सिंघाड़ा, मूली, सीताफल, अमरुद और अन्य ऋतु, मंडप तैयार करने के लिए गन्ने, भगवान विष्णु की प्रतिमा, तुलसी का पौधा, चौकी, धूप, दीपक, वस्त्र, माला, फूल, सुहाग का सामान, सुहाग का प्रतीक लाल चुनरी, साड़ी, हल्दी.श्री हरि विष्णु जी की आरती (Vishnu Ji Ki Aarti)
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
श्री शालिग्राम जी की आरती (Shaligram Ji Ki Aarti)
शालिग्राम सुनो विनती मेरी ।यह वरदान दयाकर पाऊं ।।
प्रात: समय उठी मंजन करके ।
प्रेम सहित सनान कराऊँ ।।
चन्दन धुप दीप तुलसीदल ।
वरन -बरन के पुष्प चढ़ाऊँ ।।
तुम्हरे सामने नृत्य करूँ नित ।
प्रभु घंटा शंख मृदंग बजाऊं ।।
चरण धोय चरणामृत लेकर ।
कुटुंब सहित बैकुण्ठ सिधारूं ।।
जो कुछ रुखा सूखा घर में ।
भोग लगाकर भोजन पाऊं ।।
मन वचन कर्म से पाप किये ।
जो परिक्रमा के साथ बहाऊँ ।।
ऐसी कृपा करो मुझ पर ।
जम के द्वार जाने न पाऊं ।।
माधोदास की बिनती एहि है ।
हरी दासन का दास कहाऊं ।।
तुलसी पूजन के मंत्र
तुलसी जी के पूजा के दौरान उनके इन नाम मंत्रों का उच्चारण करेंॐ सुभद्राय नमः
ॐ सुप्रभाय नमः
तुलसी दल तोड़ने का मंत्र
मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी
नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते ।।
रोग मुक्ति का मंत्र
महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
तुलसी स्तुति का मंत्र
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।
तुलसी विवाह विधि (Tulsi Vivah Vidhi)
तुलसी विवाह में शामिल होने वाले लोगों को नहा धोकर और स्वच्छ कपड़े पहनकर विवाह में शामिल होना चाहिए। जो लोग तुलसी विवाह में कन्यादन की रस्म करते हैं उन्हें व्रत रखना चाहिए।तुलसी और शालिग्राम का विवाह संपन्न कराने के लिए तुलसी के पौधे को आंगन में एक चौकी पर स्थापित करें। आप चाहे तो तुलसी विवाह छत या मंदिर में भी संपन्न करा सकते हैं।
तुलसी के पौधे की चौकी के पासएक दूसरी चौकी पर शालिग्राम भगवान को स्थापित करें। साथ ही चौकी पर अष्टदल कमल भी बना लें। इसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करें।
कलश पर स्वास्तिक बनाकर उस पर आम के पांच पत्ते वृत्ताकार में रखें। फिर एक नए लाल कपड़े में नारियल लपेटकर उसे कलश के ऊपर रख दें।
तुलसी के गमले में गेरू से सजाएं। साथ ही गमले के पास जमीन पर भी रंगोली बना लें। तुलसी के गमले को शालिग्राम की चौकी के दाएं तरफ रख दें।
तुलसी के पौधे के समक्ष घी का दीपक जलाएं। इसके बाद फूल के द्वारा गंगाजल का तुलसी और शालिग्राम पर छिड़काव करते हुए इस मंत्र का जाप करें-‘ॐ तुलसाय नमः’। अब तुलसी को रोली और शालिग्राम को चंदन का टीका लगाएं।
तुलसी के गमले की मिट्टी में गन्ने का मंडप तैयार करें और तुलसी के पौधे को लाल चुनरी ओढ़ा दें। इसके साथ ही गमले को साड़ी लपेट कर तुलसी को चूड़ी पहनाएं। तुलसी माता को इस दिन दुल्हन की तरह तैयार करें। शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराकर पीला वस्त्र पहनाएं।
इसके बाद तुलसी और शालिग्राम भगवान को हल्दी लगाएं। साथ ही गन्ने के मंडप पर भी हल्दी का लेप लगाएं।
इसके बाद शालिग्राम को चौकी समेत हाथ में लेकर तुलसी की सात बार परिक्रमा करें। इस दौरान इस बात का खास ख्याल रखें कि शालिग्राम की चौकी घर का कोई पुरुष सदस्य ही गोद में उठाये। तुलसी विवाह के दौरान मंगल गीत जरूर गाते रहें।
अंत में तुलसी माता और शालिग्राम भगवान की आरती करें। तुलसी विवाह संपन्न हो जाने की घोषणा करें और उन्हें भोग लगाएं।
इस दिन तुलसी और शालिग्राम को खीर और पूड़ी का भोग जरूर लगाएं। विवाह संपन्न होने की घोषणा कर दें।
दुल्हन की तरह तुलसी का करें श्रृंगार
तुलसी के गमले की मिट्टी में ही गन्ने से मंडप बनाएं और उस पर सुहाग का प्रतीक लाल चुनरी ओढ़ा दें। इसके साथ ही गमले को साड़ी लपेट कर तुलसी को चूड़ी पहना कर उनका दुल्हन की तरह श्रृंगार करें।तुलसी माता की आरती (Tulsi Mata Ki Aarti)
जय जय तुलसी माता,मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता,
सबकी वर माता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
सब योगों से ऊपर,
सब रोगों से ऊपर ।
रज से रक्ष करके,
सबकी भव त्राता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
बटु पुत्री है श्यामा,
सूर बल्ली है ग्राम्या ।
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे,
सो नर तर जाता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
हरि के शीश विराजत,
त्रिभुवन से हो वंदित ।
पतित जनों की तारिणी,
तुम हो विख्याता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
लेकर जन्म विजन में,
आई दिव्य भवन में ।
मानव लोक तुम्हीं से,
सुख-संपति पाता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
हरि को तुम अति प्यारी,
श्याम वर्ण सुकुमारी ।
प्रेम अजब है उनका,
तुमसे कैसा नाता ॥
हमारी विपद हरो तुम,
कृपा करो माता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
जय जय तुलसी माता,
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता,
सबकी वर माता ॥
तुलसी विवाह की कथा (Tulsi Vivah Katha)
प्राचीन काल में जालंधर नाम का एक राक्षस हुआ करता था। जिसने चारों तरफ बहुत उत्पात मचा रखा था। राक्षस बेहद ही वीर और पराक्रमी था। राक्षस की वीरता का रहस्य था उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म। पूरी कथा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंतुलसी विवाह से कन्यादान बराबर मिलता है पुण्य
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी-शालीग्राम विवाह संपन्न किया जाता है। हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन तुलसी और भगवान विष्णु के शालीग्राम रूप का विवाह कराया जाता है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी-शालीग्राम विवाह का आयाेजन कराने वाले व्यक्ति को कन्या दान के समान पुण्य मिलता हैतुलसी विवाह पूजा सामग्री लिस्ट (Tulsi Vivah Puja Samagri List)
पूजा में मूली, आंवला, बेर, शकरकंद, सिंघाड़ा, मूली, सीताफल, अमरुद और अन्य ऋतु, मंडप तैयार करने के लिए गन्ने, भगवान विष्णु की प्रतिमा, तुलसी का पौधा, चौकी, धूप, दीपक, वस्त्र, माला, फूल, सुहाग का सामान, सुहाग का प्रतीक लाल चुनरी, साड़ी, हल्दी.तुलसी पूजा मंत्र (Tulsi Puja Mantra)
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