लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार ने नवाजे जाने के बाद रवि शास्त्री ने बताया कौन सा है उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ पल
बीसीसीआई द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजे जाने के बाद टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और कोच रवि शास्त्री ने अपने क्रिकेट करियर का सर्वश्रेष्ठ पल गाबा टेस्ट में टीम इंडिया की जीत को बताया है। जानिए अवार्ड हासिल करने के बाद क्या बोले रवि शास्त्री?
लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड ग्रहण करते रवि शास्त्री (साभार BCCI/jio Cinema Sreen Grab)
हैदराबाद: पूर्व भारतीय ऑलराउंडर और टीम इंडिया के मुख्य कोच रहे रवि शास्त्री को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने ‘लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार’ से सम्मानित किया। हैदराबाद में आयोजित समारोह में शास्त्री के अलावा पूर्व विकेटकीपर फारुख इंजीनियर को भी साल 2019-20 के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
61 वर्षीय रवि शास्त्री पिछले चार दशक से भारतीय क्रिकेट में विभिन्न रूप में सक्रिय हैं। क्रिकेटर और कोच के अलावा उनकी पहचान एक मशहूर कमेंट्रेटर के रूप में भी बनी जिन्होंने कई ऐतिहासिक पलों को हमेशा के लिए यादगार बना दिया। शास्त्री ने भारत के लिए करियर में 80 टेस्ट और 150 अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच खेले। शास्त्री साल 1983 में विश्व कप जीतने वाले टीम के सदस्य रहे।
ऐसा रहा है चार दशक का क्रिकेट के मैदान में करियर
इकसठ साल के शास्त्री ने 80 टेस्ट और 150 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय में भारत का प्रतिनिधित्व किया। संन्यास लेने के बाद उन्होंने कमेंटेटर के रूप में पहचान बनाई। भारतीय क्रिकेट टीम के शास्त्री दो बार कोच रहे। साल 2014 से 2016 तक वो टीम के साथ निदेशक के रूप में जुड़े। इसके बाद विराट कोहली की कप्तानी में उन्होंने 2017 से 2021 के बीच टीम के मुख्य कोच की भूमिका निभाई। साल 2021 में यूएई में भारत की मेजबानी में खेले गए टी20 विश्व कप के साथ उनका कार्यकाल खत्म हो गया।
दो बार रहे टीम इंडिया के कोच, नहीं जिता पाए आईसीसी ट्रॉफी
शास्त्री के कार्यकाल में भारतीय टीम कोई आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जी सकी। ऑस्ट्रेलिया में लगातार दो बार टेस्ट सीरीज जीतना उनकी बतौर कोच सबसे बड़ी उपलब्धि रही। पहले वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में शास्त्री के कोच रहते भारतीय टीम पहुंची लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ हार ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन बनने का सपना टूट गया। 2019 के वनडे विश्व कप में भारतीय टीम सेमीफाइनल में पहुंची थी वहां भी कीवी टीम ही राह का रोड़ा बनी थी।
यह मेरे लिए है भावनात्मक पल
लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड ग्रहण करने के बाद शास्त्री ने कहा, यह उनके लिए भावनात्मक पल है। उन्होंने कहा, 'यह निश्चित रूप से (एक भावनात्मक क्षण) है। यहां आने के लिए आप सबका धन्यवाद। मुझे यह सम्मान देने के लिए मैं बीसीसीआई को धन्यवाद देता हूं। खेल में चार दशक हो गए हैं और आप अब भी भारतीय क्रिकेट से जुड़े हुए हैं। यह मेरे लिए एक बहुत ही मर्मस्पर्शी क्षण है क्योंकि जब मैंने 17 साल की उम्र में अपना क्रिकेट शुरू किया और एक खिलाड़ी के रूप में इसे 31 साल की उम्र में समाप्त किया, वास्तव में 30 साल की उम्र में, इस दौरान बीसीसीआई मेरा अभिभावक बना रहा।'उस दौर में खेल में पैसा नहीं था लेकिन खेलने का गर्व था। मैंने बीसीसीआई को विश्व क्रिकेट का पॉवरहाउस बनता देखा है।
1985 में चैंपियन ऑफ चैंपियंस बनना यादगार
अपने करियर के एक सर्वश्रेष्ठ पल के बारे में पूछे जाने पर शास्त्री ने कहा, एक पल चुन पाना थोड़ा मुश्किल है। 1985 में चैंपियंस ऑफ चैंपियन बनना यादगार पल है। पाकिस्तान के खिलाफ मेलबर्न में हमने वो जीत हासिल की थी। 1983 में वर्ल्ड कप जीते और लॉर्ड्स की बॉलकनी में विश्व कप की ट्रॉफी हासिल करना। वेस्टइंडीज में शतक, ऑस्ट्रेलिया में दोहरा शतक जैसे मेरे बेहतरीन पल बतौर खिलाड़ी हैं।
गाबा टेस्ट जीत है सबसे यादगार पल
शास्त्री ने आगे कहा, कमेंट्री के दौरान वानखेड़े में एमए धोनी का वो मैच विजयी छक्का जड़ना, 2007 में उनका टी20 विश्व कप जीतना, बतौर कोच ऑस्ट्रेलिया में लगातार दो टेस्ट सीरीज जीतना। लेकिन इन सबके बीच अगर आप पूछें आईसिंग इन द केक, वो पल है गाबा में वो आखिरी दिन जब हम जीत की रेखा पार करने में सफल रहे। ऋषभ पंत का हमें गाबा में जीत दिलाने वाला पल मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ है। इसके लिए मैं अपने सभी खिलाड़ियों को शुक्रिया कहना चाहता हूं। वो मेडल मेरे लिए सबसे बेशकीमती है।
(भाषा इनपुट के साथ)
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नवीन चौहान author
नवीन चौहान टाइम्स नाउ हिंदी (Timesnowhindi.com) की स्पोर्ट्स टीम के सदस्य हैं। वो मूल रूप से मध्य...और देखें
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