प्रदूषण के चलते दिल्ली-NCR में निर्माण पर बैन, मजदूरों की कमाई को कर सकता है प्रभावित
यह प्रतिबंध रेलवे सेवाओं या स्टेशनों, मेट्रो रेल सेवाओं और स्टेशनों, हवाई अड्डों, अंतर-राज्य बस टर्मिनलों, राष्ट्रीय सुरक्षा या रक्षा-संबंधी गतिविधियों या राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं, अस्पतालों या स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की परियोजनाओं को छूट देता है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद गैर-जरूरी निर्माण पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद गैर-जरूरी निर्माण पर प्रतिबंध लगाए जाने पर रियल एस्टेट डेवलपर के निकाय नारेडको ने सरकार के कदम को समर्थन देते हुए चिंता जताई है। वहीं, बिल्डरों के निकाय क्रेडाई ने सदस्यों से कार्यस्थलों पर प्रदूषण-रोधी कदम उठाने के लिए कहा है। नारेडको के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी हरि बाबू ने कहा कि प्रदूषण से हर कोई चिंतित है और जागरूक कॉर्पोरेट, रियल एस्टेट डेवलपर्स इस खतरे को रोकने के लिए सक्रिय रूप से उपाय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस खतरे से लड़ने में पूरा क्षेत्र सरकार के साथ है।
प्रोजेक्ट्स में हो सकती है देरी
बाबू ने एक बयान में कहा कि लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि एक महीने के लिए निर्माण रोकने से परियोजना में कम से कम तीन महीने की देरी हो जाती है। साथ ही इसका असर आजीविका पर भी पड़ता है। चूंकि यह क्षेत्र देश में अकुशल श्रम के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है, इसलिए इसके प्रभाव बहुत बड़े हैं। नारेडको के अध्यक्ष ने कहा कि व्यापक राष्ट्रीय हित में दोनों पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर इन मुद्दों से निपटना जरूरी है।
प्रभावित हो सकती है आजीविका
कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज गौड़ ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए अधिकारियों के प्रयासों का पूरा समर्थन करता है, लेकिन इसमें कुछ आपत्तियां भी हैं। उन्होंने कहा कि विनिर्माण गतिविधियों पर एक महीने के प्रतिबंध से परियोजना पूरी होने में कम से कम दो से तीन महीने की देरी होगी। रियल एस्टेट क्षेत्र इस कदम से चिंतित है क्योंकि परियोजना लागत में वृद्धि हो सकती है और निर्माण श्रमिकों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद डेवलपर्स राष्ट्रीय हरित न्याधिकरण (एनजीटी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए प्रदूषण को कम करने के लिए नियमित रूप से पानी छिड़कने और धुंध-रोधी मशीनें लगाने जैसे उपाय सक्रिय रूप से करते हैं।
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