GST: टैक्स रिटर्न को लेकर ‘फेसलेस’ आकलन में अभी लगेगा और वक्त, जानिए कैसे करता है ये काम
फेसलेस आकलन जांच में टैक्स अधिकारी और टैक्सपेयर्स आमने-सामने नहीं आते और इसमें दस्तावेज को भौतिक रूप से पेश करने की भी जरूरत नहीं होती। करदाता और कर अधिकारी के आमने-सामने आये बिना (फेसलेस) आकलन की व्यवस्था सबसे पहले आयकर विभाग ने शुरू की थी। जीएसटी को एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था।
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के तहत टैक्स रिटर्न के आकलन को लेकर टैक्सपेयर्स और अधिकारी के आमने-सामने आए बिना जांच व्यवस्था शुरू करने में कुछ समय लग सकता है। जीएसटी नेटवर्क के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। करदाता और कर अधिकारी के आमने-सामने आये बिना (फेसलेस) आकलन की व्यवस्था सबसे पहले आयकर विभाग ने शुरू की थी। बाद में सीमा शुल्क विभाग ने इसे अपनाया।
क्या है फेसलेस आंकलन?
फेसलेस आकलन जांच में टैक्स अधिकारी और टैक्सपेयर्स आमने-सामने नहीं आते और इसमें दस्तावेज को भौतिक रूप से पेश करने की भी जरूरत नहीं होती। जीएसटी नेटवर्क के उपाध्यक्ष (सेवा) जगमाल सिंह ने यहां उद्योग मंडल फिक्की के एक कार्यक्रम में कहा कि हमें जीएसटी में ‘फेसलेस’ आकलन शुरू करने में कुछ समय लग सकता है। जीएसटी आकलन एक विशेष क्षेत्राधिकार अधिकारी या इकाई से जुड़ा हुआ है। इसे बदलने में कुछ समय लग सकता है। इसे प्रभावी बनाने के लिये नीतिगत स्तर पर कुछ बदलावों की भी जरूरत होगी।
जोरदार कलेक्शन
जीएसटी को एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। इसमें उत्पाद शुल्क, सेवा कर, मूल्यवर्धित कर (वैट) और उपकर सहित 17 स्थानीय शुल्क शामिल किए गए हैं। बता दें कि साल 2017 में सरकार ने पुरानी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था की जगह देश भर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया था। इसे टैक्स सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया था।
अक्टूबर के महीने में जीसएटी कलेक्शन में जोरदार उछाल देखने को मिला था। अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन में 13 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया था। ये 1.62 लाख करोड़ से बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया था।
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