NDRF न होती तो और भयानक हो सकता था मौतों का आंकड़ा, जानिए ये कौन हैं और इन्हें मसीहा क्यों कहा जाता है
Odisha Train Accident: शुक्रवार, 2 जून को ओडिशा के बालासोर जिले में हुए भीषण रेल हादसे में 288 लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग घायल हुए। इस हादसे में एक मालगाड़ी और दो यात्री ट्रेनें हादसे का शिकार हो गई थीं। लेकिन, हादसे की जगह पर मसीहा नहीं पहुंचते तो मौतों का आंकड़ा बहुत आगे तक पहुंच सकता था।
ओडिशा रेल हादसे में लोगों की जान बचाने में NDRF ने निभाई सबसे बड़ी भूमिका
Odisha Train Accident: शुक्रवार, 2 जून को ओडिशा के बालासोर जिले में हुए भीषण रेल हादसे में 288 लोगों की जान चली गई और सैकड़ों लोग घायल हुए। लेकिन, हादसे की जगह पर मसीहा नहीं पहुंचते तो मौतों का आंकड़ा बहुत आगे तक पहुंच सकता था। जी हां, हम बात कर रहे हैं उन मसीहा की जिन्हें पूरी दुनिया NDRF के नाम से जानती है। हादसे के तुरंत बाद सबसे पहले बहानागा पहुंचने वालों में NDRF के जवान ही थे, जिन्होंने अपना सबकुछ दांव पर लगाकर मलबे का ढेर बनी ट्रेन के डिब्बों में फंसे लोगों को बाहर निकाला और समय पर अस्पताल पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
आखिर ये NDRF है क्या
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अगर NDRF के जवान समय पर बहानागा नहीं पहुंचते और तेजी से काम नहीं करते तो बालासोर रेल हादसे में मारे गए लोगों की संख्या काफी ज्यादा हो सकती थी। एनडीआरएफ का पूरा नाम राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (National Disaster Response Force) है। भारत में साल 2006 में NDRF का गठन किया गया था, जिसमें 8 बटालियन शामिल थे, मौजूदा समय में NDRF में अब 12 बटालियन हैं और प्रत्येक बटालियन में 1149 जवान शामिल हैं। NDRF का मुख्य उद्देश्य किसी भी प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं से निपटना और असाधारण स्पीड के साथ मानवहित की मदद करना है।
कैसी परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं एनडीआरएफ के जवान
NDRF की 12 बटालियन में BSF और CRPF की 3-3 बटालियन तो CISF, ITBP और SSB की 2-2 बटालियन शामिल हैं। प्रत्येक बटालियन में इंजीनियर, टैकनीशियन, इलेक्ट्रीशियन, डॉग स्क्वॉड, मेडिकल और पैरामेडिक्स सहित सर्च और रेस्क्यू टीम हैं। सभी 12 बटालियनों को प्राकृतिक और साथ ही मानव निर्मित आपदाओं से निपटने के लिए सुसज्जित और प्रशिक्षित किया गया है। बटालियनों को रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) आपात स्थितियों के दौरान प्रतिक्रिया के लिए भी प्रशिक्षित और सुसज्जित किया जाता है।
भीषण प्राकृतिक आपदाओं में अहम भूमिका निभाते हैं NDRF के जवान
भूकंप, बाढ़, भूस्खलन जैसी भीषण प्राकृतिक आपदाओं में NDRF की भूमिका सबसे बड़ी होती है। NDRF के जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर देशभर में आई तमाम प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं में लाखों लोगों की जान बचाई है, यही वजह है कि हम इन्हें मसीहा कहकर बुलाते हैं।
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मैं सुनील चौरसिया,. मऊ (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला हूं और अभी दिल्ली में रहता हूं। मैं टाइम्स नाउ नवभारत में बिजनेस, यूटिलिटी और पर्सनल फाइनेंस पर...और देखें
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