100 मिनट, 100 गेंदें, 3 रनः एक हाथ से बल्लेबाजी करते हुए इस बल्लेबाज की यादगार दिलेरी

Today in Cricket History, 15 January: इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली एशेज सीरीज हमेशा खास रही है। जब 1963 में सिडनी के मैदान पर ये टीमें भिड़ीं तब जॉन मर्रे ने कुछ अद्भुत कर दिखाया।

Cricket History
जब जॉन मुर्रे ने दिखाई सबसे दिलेर बल्लेबाज (Representative Image)  |  तस्वीर साभार: AP
मुख्य बातें
  • क्रिकेट इतिहास में आज का दिन (15 जनवरी)
  • जॉन मर्रे ने आज के दिन कुछ अजीबोगरीब और दिलचस्प करके दिखाया था
  • इंग्लैंड के पूर्व विकेटकीपर थे जॉन मुर्रे

टेस्ट क्रिकेट इस खेल का सबसे लंबा फॉर्मेट है और यहां बल्लेबाज धैर्य से खेलने में विश्वास रखते हैं। लेकिन आज से ठीक 58 साल पहले 15 जनवरी 1963 को इंग्लैंड के विकेटकीपर बल्लेबाज जॉन मुर्रे ने कुछ ऐसा कर दिखाया था जो अजीब भी था और बहुत दिलचस्प भी। उन्होंने ये कमाल भी किसी छोटी-मोटी सीरीज में नहीं बल्कि दिग्गज ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ प्रतिष्ठित एशेज सीरीज में किया था।

इंग्लैंड की टीम 1963 में एशेज सीरीज खेलने ऑस्ट्रेलिया गई हुई थी। सिडन में खेले गए उस सीरीज के तीसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड की टीम पहली पारी में 279 रन पर सिमट गई थी जिस दौरान उनके विकेटकीपर बल्लेबाज जॉन मुर्रे पहली ही गेंद पर शून्य पर आउट हो गए थे। जवाब में उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने 319 रनों का स्कोर खड़ा किया।

जॉन मुर्रे की ऐतिहासिक पारी

इसके बाद दूसरी पारी का आगाज हुआ और इंग्लैंड की टीम मजबूत इरादे के साथ मैदान पर उतरी लेकिन सबको हैरान करते हुए उनकी पूरी टीम कुल 104 रन पर ढेर हो गई। इस पूरी पारी में कुछ भी दिलचस्प नहीं था सिर्फ एक चीज को छोड़कर..वो चीज थी जॉन मुर्रे की पारी। इस विकेटकीपर बल्लेबाज के एक कंधे में चोट लग गई थी लेकिन उसके बावजूद वो पिच पर अंत तक टिके रहे।

उनकी पारी के आंकड़े जिसने सुना वो हैरान रह गया। मुर्रे ने 100 मिनट बल्लेबाजी की जिस दौरान उन्होंने 100 गेंदों का सामना किया और नाबाद 3 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इस पारी के दौरान ज्यादातर समय मुर्रे ने चोटिल होने के कारण एक हाथ से बल्लेबाजी की लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और ना ही कोई ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज उन्हें आउट कर सका।

आसानी से हासिल हुआ लक्ष्य

इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के सामने कुल 65 रनों का लक्ष्य रखा गया जिसे उन्होंने कुल 2 विकेट गंवाते हुए 12.2 ओवर के अंदर हासिल कर लिया। उन दिनों इंग्लैंड के पास महान फ्रेड ट्रूमन जैसा धाकड़ गेंदबाज था लेकिन फिर भी वो जीत नहीं सके।

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