बॉलीवुड की पहली महिला कॉमेडियन कहलाई जाने वाली टुन टुन का नाम तो आपने सुना ही होगा। अपनी बेहतरीन कॉमेडी और गायकी के लिए जानी जाने वाली टुन टुन की जिंदगी बहुत परेशानियों और मुश्किलों से भरी थीं।
टुन टुन का जन्म 11 जुलाई 1923 को उत्तर प्रदेश में अमरोहा जिले के पास एक छोटे से गांव में हुआ था और उनका नाम उमा देवी खत्री रखा गया। उमा तब केवल 2 या 2.5 साल की ही थीं तब जमीन के लिए उनके माता- पिता और भाई की हत्या कर दी गई थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, 'मुझे याद नहीं है कि मेरे माता- पिता कौन थे और कैसे दिखते थे। मेरा एक भाई थी हरी, हम एक गांव में रहते थे। मेरे भाई की भी हत्या कर दी गई थी और मुझे नौकर बनने के लिए रिश्तेदारों के पास छोड़ दिया गया ताकि मुझे दो टाइम का खाना मिल सके।' मालूम हो कि टुन टुन को उनके चाचा ने पाला था।
भागकर मुंबई आ गईं थीं टुन टुन
टुन टुन सिंगर बनना चाहती थीं और इसी वजह से 1946 में 23 साल की उम्र में ट्रेन पकड़कर वो मुंबई भागकर आ गईं। यहां उनकी मुलाकात एक्टर- डायरेक्ट अरुण आहूजा और गायिका निर्मला देवी से हुई जो कि गोविंदा के माता- पिता थे। उन दोनों ने उमा यानी टुन टुन को बहुत से प्रोड्यूसर से करवाया और फिर उनकी मुलाकात हुई संगीतकार नौशाद अली से। टुन टुन ने उन्हें कहा कि वो गा सकती हैं और अगर उन्होंने उन्हें गाने का मौका नहीं दिया तो वो समंदर में कूदकर जान दे देंगी।
टुन टुन को मिला पहला मौका
नौशाद अली ने टुन टुन को गाने के लिए कहा और ऐसे उन्हें अपना पहला ब्रेक फिल्म Wamiq Azra से मिला। इसके बाद उन्होंने कई बेहतरीन गाने गाए जिसमें अफसाना लिख रही हूं दिले बेकरार का, ये कौन चला मेरी आंखों में समाकर, आज मची है धूम झूम खुशी में झूम, बेताब है दिल दर्द ए मोहब्बत के असर से शामिल हैं।
टुन टुन गायकी में अच्छा काम कर रही थीं कि एक दिन नौशाद ने उन्हें कहा कि उन्हें एक्टिंग में हाथ आजमाना चाहिए क्योंकि उनकी पर्सनैलिटी बहुत चुलबुली है और बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग है यानी वो मजाक बहुत अच्छा करती हैं। टुन टुन एक्टर दिलीप कुमार को बहुत पसंद करती थीं और उन्होंने जिद पकड़ ली कि वो पहली फिल्म में उन्हीं के साथ काम करेंगी। नौशाद और दिलीप कुमार अच्छे दोस्त थे जिसके चलते टुन टुन को साल 1950 में फिल्म बाबुल में काम मिल गया।
इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और अपने एक्टिंग करियर में टुन टुन ने 198 फिल्मों में काम किया, जिसमें हिंदी, उर्दू और पंजाबी फिल्में शामिल हैं। जिसमें शहजादे, एक आदमी, खेल मोहब्बत का, घर द्वार, समा, कमला, हादसा, कुली, हीरों का चोर, डिस्को डांसर, अपराधी कौन?, नमक हलाल, बीवी ओ बीवी, अंधेरा, कुर्बानी, बातों बातों में जैसी कई फिल्में शामिल हैं।
बता दें कि टुन टुन के चार बच्चे थे और चार नाती- पोते थे। उनका निधन 24 नवंबर 2003 को हुआ था और उस समय वो 80 साल की थीं।
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